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कहानी अद्वितीय की !

मेरा नाम वेणु गीता भटनागर और मेरे पति का नाम प्रदीप कुमार भटनागर है। हमारा बेटा अद्वितीय कुमार भटनागर 26 वर्ष का है। मेरे पति ओ.एन.जी.सी. से ग्रुप जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए हैं। अद्वितीय के दादाजी भी हमारे साथ रहते हैं। जब अद्वितीय एक साल का था तो उसके नाना ने कहा कि वह उंगली से इशारा करने पर उधर नहीं देखता और साथ ही अपने आप से बहुत बात करता था जो कि हमें समझ नहीं आती थी। इसके अतिरिक्त वह हाइपरेक्टिव भी बहुत था। कहीं भी एकदम से भाग जाता था। दो साल की उम्र में हमने अद्वितीय को गंगाराम अस्पताल में दिखाया।

जहां डाक्टर ने EEG, BERA TEST आदि करने के बाद बड़ा नकारात्मक सा डायग्नोसिस दिया और वे ‘ऑटिस्म’ डायग्नोज भी नही कर पाए थे। ओएनजीसी हॉस्पिटल की डॉक्टर ने हमें साइकोलॉजिस्ट से सम्पर्क करने के लिए कहा। जिसने PDD NOS डायग्नोज किया। उस समय हम देहरादून में थे, जहां ऑटिज्म की ज्यादा जानकारी नहीं थी। जब अद्वितीय छह साल का था तब हमारा ट्रान्सफर चेन्नई में हो गया। वहां हमने मैरी बरुआ की वर्कशॉप अटेंड करी और हमें ऑटिज्म के बारे में विस्तार से जानकारी मिली और हमें क्या करना चाहिए, कैसे करना है यह सब पता चला।

हमने इसके बाद कई वर्कशॉप अटेंड की। उस समय आजकल की तरह की थेरैपी नहीं थीं। जो कुछ भी हमने सीखा वो पढ़कर या वर्कशॉप से सीखा। आजकल इंटरनेट एक वरदान है पर साथ ही सावधान भी रहना चाहिए। हमने अद्वितीय के साड़े तीन साल का होने पर एक पास के स्कूल में उसका दाखिला कराया। तब हमें समझ भी नही थी और स्कूल को भी ऑटिज्म के बारे में नहीं पता था इसलिए काफी समस्याएं आई।

फर्स्ट स्टैंडर्ड से अद्वितीय केंद्रीय विद्यालय स्कूल में जाने लगा। वहां टीचर्स कुछ अनुभवी थे। 4th स्टैंडर्ड तक प्रॉब्लम्स कम थीं, पर उसके बाद प्रॉपर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने से प्रॉब्लम्स ज्यादा होती गईं। शुरु से जो बच्चे साथ थे वो ट्रांसफर पर चले गए और नए बच्चों के साथ इतना आसान नहीं था। 8 स्टैंडर्ड में हमने चेन्नई के एक बहुत ही नामी स्पेशल स्कूल में दाखिला कराया। लेकिन वहां का अनुभव बहुत ही खराब था। कहने को उन्होंने अपने प्रॉस्पेक्टस में बहुत कुछ लिखा पर वास्तव में कुछ भी नहीं किया। इस बीच हमारा ट्रांसफर दिल्ली हो गया और हमने यहां होमस्कूलिग के द्वारा NIOS से 10th और 12th कराया।

जब अद्वितीय 6 साल का था तो देहरादून में जो चोपड़ा के द्वारा चलाए गए लतिका विहार में कुछ समय के लिए गया था वहां हमें इसके संगीत में रुचि के बारे में पता चला। चेन्नई में उसने Piano और वोकल की विधिवत् ट्रेनिंग ली। उसने पियानो में सभी 8 ग्रेड्स ट्रिनिटी स्कूल ऑफ लंडन से पास कर लिए हैं और अभी Keyboard में उसी स्कूल से 8 ग्रेड की तैयारी कर रहा है। हिंदुस्तानी वोकल में प्राचीन कला केन्द्र से विशारद का इम्तिहान पास कर लिया है। अभी गत दो साल से अद्वितीय गुड़गांव के स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल में सप्ताह में एक बार क्लास लेने जाता है। मैं Mrs Bakhtawar Saini Ji की बहुत आभारी हूं जिन्होंने अद्वितीय को ये अवसर दिया जिससे वह टीचिंग का एक्सपीरियंस ले सके।

भविष्य में हम अद्वितीय को संगीत से संबंधित फील्ड में ही कुछ कराना चाहते हैं। अद्वितीय खुद मेट्रो से आ जा सकता है। वह गुड़गांव मेट्रो से जाता है। बस और ऑटो में भी अपने आप ट्रैवल करता है। इसके अलावा स्कूटर भी ड्राइव करता है। मार्केट का भी सभी काम कर लेता है। साथ ही किचन में भी मेरी हेल्प कराता है। जरूरत होने पर अपना खाना अपने आप बना लेता है। समाज के बीच घुलना-मिलना ही उसकी सबसे बड़ी चुनौती है। यही है हमारा अभी तक का सफर। एक बात और अद्वितीय ने हमें एक बेहतर इंसान बनाया है। ऐसा हमें लगता है। इन बच्चों को बहुत सारा प्यार और असीमित धीरज के सात ही कुछ कराया जा सकता है। हर बच्चा भिन्न भिन्न प्रकार से गिफटिड है। चाहिए तो बस धीरज और बच्चे के हिसाब से अपने आप को बदलना।

अद्वितीय के यू ट्यूब चैनल का लिंक मैं शेयर करना चाहती हूं https://www.youtube.com/user/jijjan1

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