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सौरभ मौर्या - ब्लड कमांडो

न्यूज़ चैनल, रेडियो और अन्य माध्यमों के द्वारा अक्सर बड़ी-बड़ी ख़बरे तो बेहद असानी से हम तक पहुँच जाती है, चाहे हमारे जीवन में उनका कोई ख़ास महत्व हो या न हो। ऐसी खबरों के बीच अक्सर हम उन लोगों से अपरिचित रह जाते है जो देश के किसी कोने में बैठे एक अहम योगदान दे रहे होते है। ऐसे लोगों तक ना तो मीडिया पहुँच पता है और ना ही आम लोगों की नज़रे। परन्तु कुछ काम ऐसे होते है जो मैडल, ट्राफी या सिर्फ तारीफ़ों तक ही सीमित नहीं रहते। आइये हम बात कर रहे है सौरभ मौर्या जी की, जिन्हे अगर आप नहीं जानते है तो हम आपको उनसे परिचित करवाने जा रहे हैं। जो जरूरतमंदों के लिए सही समय पर निशुल्क रक्त उपलब्ध करवाते है। तो आइए Lets Help India के साथ हुए उनके साक्षात्कार को पढ़ते है:

अपना संक्षिप्त परिचय दे जैसे की परिवार, शिक्षा, व्यवसाय इत्यादि?

मैं एक छोटा सा व्यापारी हूं। पिता का नाम श्री उदय नारायण मौर्य है। परिवार में माता-पिता के साथ मेरी पत्नी और दो बेटे हैं और एक छोटा भाई है। भारत के उज्जवल भविष्य के लिए मैं “साधना फाउंडेशन” नाम की एक संस्था भी चलाता हूं। जिसके जरिए जरूरतमंदों को सही समय पर निशुल्क रक्त की प्राप्ति होती है। हमारे द्वारा अब तक 57 बार रक्तदान किया गया है। जिसमें 38 बार रक्तदान और 19 बार प्लेटलेट का दान किया गया है। साथ ही मैं अपनी 30 वर्ष की आयु में अंगदान और देहदान के लिए भी पंजीकरण करा चुका हूं। इसके अलावा मैं उत्तर प्रदेश के “प्रदेश प्रवक्ता” के रूप में “लोक जनशक्ति पार्टी” की कमान भी संभाल रहा हूं।

रक्तदान करने की प्रेरणा कहां से मिली ?

वाराणसी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के साथ सुंदर लाल अस्पताल में वर्ष 2012 में एक थैलेसीमिया पीड़ित बच्ची का निधन मेरे सामने हुआ था। खून की कमी की वजह से उसकी मौत का होना और उसपर उसके मां-बाप का बुरी तरह से रोना-कराह बेहद दुखद था। बस वही से इस प्रेरणा ने जन्म लिया।

“साधना फाउंडेशन” संस्था का मिशन क्या है? और इस संस्था को बनाने की प्रेरणा आपको कहां से मिली ?

“साधना फाउंडेशन” का मिशन है पूरे भारतवर्ष में किसी की भी मौत खून की कमी से ना हो और इसीलिए राष्ट्रीय रक्त संचरण परिषद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की गाइडलाइन और राष्ट्रीय रक्त नीति का पालन करते हुए भारत सरकार के मिशन विजन 2020, 100% स्वैच्छिक रक्तदान की कार्यप्रणाली को सफल बनाने के लिए “साधना फाउंडेशन” भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर कार्य कर रही है। इसके साथ ही साथ रक्तदान के क्षेत्र में पूरे भारत में ब्लड बैंकिंग सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने और राष्ट्रीय रक्त नीति का पालन कराने वाली भारत की सबसे बड़ी संस्था “फेडरेशन ऑफ इंडियन ब्लड डोनर ऑर्गेनाइजेशन” के उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर का “प्रदेश सचिव” भी हूं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में ब्लड बैंकिंग सिस्टम को सुचारु रुप से चलाने में राज्य रक्त संचरण परिषद उत्तर प्रदेश सरकार की भी मदद साधना फाउंडेशन करती है।

मैं रक्तदान तो वर्ष 2008 से ही निरंतर करते आ रहा था। मगर जब समझ में आया कि ये काम एक संगठन के रूप में बड़े पैमाने पर भी किया जा सकता है। तो मैंने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर साल 2012 में इस संगठन को एक रूप दिया और “साधना फाउंडेशन” को एक संस्था के रूप में रजिस्टर्ड कराया। “साधना फाउंडेशन” का मिशन रक्तदान के अलावा अंगदान और देहदान भी है। साधना फाउंडेशन द्वारा अब तक 12 लोगों ने अंगदान के लिए फॉर्म भरकर और देहदान के लिए 4 लोगों ने अपना योगदान दिया है। पूरे भारतवर्ष में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक “साधना फाउंडेशन” के साथ सहयोगी संस्थाओं के रूप में 286 संस्थाएं जुड़ी है और करीब एक लाख रक्तदानी संपर्क में है।

अपने मिशन में आपको किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

मिशन में समस्याओं का सामना हमेशा ही करना पड़ता है। आप जब कभी भी ईमानदारी और सच्चाई के साथ काम करेंगे तो सबसे पहले आप के सामने गलत लोग और अराजक तत्व ही आएंगे। “साधना फाउंडेशन” द्वारा रक्त और रक्त के अवयव के नाम पर धन उगाही करने वाले बहुत सारे अस्पतालों के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन चलाया गया। जिसके कारण कई बार हमे जान से मारने की धमकी भी मिली। कभी-कभी परिवार भी खिलाफ हो जाता है, क्योंकि यह एक ऐसा नशा है कि जिसे भी एक बार चढ़ जाए तो उतरने का नाम नहीं लेता है। यही कारण है कि कभी-कभी ऐसा होता है कि दिन और रात ब्लड बैंक में ही बीत जाता है। जिससे परिवार वाले भी नाराज हो जाया करते हैं।

रक्त दान के लिए लोगों के बीच जागरूकता कैसे फैलाते है, लोग कितना सहयोग देते है?

रक्तदान के लिए लोगों के बीच जागरूकता सबसे ज्यादा सोशल मीडिया के माध्यम से ही पहुंचती है। समय-समय पर ब्लड मोटिवेशनल प्रोग्राम भी किए जाते हैं। जिसके जरिए कई सारे लोग जुड़ते हैं और स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों में आकर भाग लेते हैं। हमारी संस्था सदस्य के पंजीकरण के लिए आजीवन सदस्यता के रूप में मात्र 300 रूपये फीस चार्ज करती है और उसी फीस से स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, ब्लड मोटिवेशनल प्रोग्राम और रक्तदान जागरूकता अभियान के तहत रैली या फिर कभी-कभी ग्रुप डिस्कशन भी किए जाते हैं।

आगे के सवालों पर जाने से पहले हम आपको बता दे की रक्तदान ना सिर्फ जरूरतमंदों के लिए वरदान हैं, बल्कि ये रक्तदान करने वाले व्यक्ति के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। नियमित रक्तदान शरीर को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बचाता हैं क्यूंकी यह शरीर में मौजूद विषैले परदार्थ को बाहर निकालता है। साथ ही नया खून बनाता है, जो सेहत के लिए काफी अच्छा होता हैं। नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन की मात्र भी संतुलित रहती है, जिससे हार्ट अटैक से संभावना कम होती हैं। 16 साल से ऊपर वाला कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। इस प्रक्रिया में बस एक खास बात ये देखी जाती है कि व्यक्ति किसी बीमारी से ग्रस्त ना हो। पूर्ण रूप से स्वस्थ्य व्यक्ति रक्तदान कर सकता है और वो चाहे तो 3 महीने के अंतराल पर दुबारा खून दे सकता हैं। चलिये अब आगे के सवाल-जवाब पर नज़र डालते हैं।

आपकी टीम किस तरह जरूरतमंद लोगों को आवश्यकता पड़ने पर मदद करती है ?

“साधना फाउंडेशन” द्वारा व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाया गया है। जिसके जरिए हिंदुस्तान के हर राज्य के कई सारे संस्थाओं के रिप्रेजेंटेटिव जुड़े हैं और साथ ही साथ फेसबुक पर पेज भी बनाया गया है। जिसके जरिए लोगों की जरूरतें हमें आती हैं और हम लोग लोकेशन लेकर वहां के सहयोगी संस्थाओं को केस भेजते हैं। इस तरह वह उनकी मदद पूरी करते हैं। हमारी संस्था सबसे ज्यादा स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाती है। जिसके जरिए ब्लड बैंकों में स्टॉक को भरा जाता है और जरूरत पड़ने पर पीड़ितों को सही समय पर ब्लड दिलाया जाता है।

हाल के वर्षो में क्या कुछ उपलब्धियां मिली? कैसी रही आपकी संघर्ष यात्रा?

“साधना फाउंडेशन” को अब तक 6 राज्य स्तरीय अवॉर्ड और दो राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं, लेकिन सबसे सुनहरा पल और शक्तिशाली पल तब दिखा जब स्वयं भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी की चिट्ठी संस्था को प्राप्त हुई। जिसमें उन्होंने खुद लोगों से अपील किया कि वे बढ़-चढ़कर संस्था के लगाए रक्तदान शिविर में भाग ले और इसे जन जागरूकता का रूप दें। अगर इस सफर को संघर्ष कहा जाए तो हमारे ख्याल से यह गलत होगा, क्योंकि जब कभी भी किसी को लंबा सफर तय करना हो, वह भी सच्चाई के रास्ते पर और समाज कल्याण के लिए तो, यह जाहिर है कि रास्ते में कई सारी रुकावटें आएंगे। मगर सकारात्मक सोच और सही नजरिए से बड़े से बड़े चट्टानों को भी तोड़ा जा सकता है।

किस तरह कोई आपकी टीम से जुड़ सकता है ?

हमारी टीम से जुड़ने के लिए दो तरीके हैं: एक वॉलंटरी जिसमें आप हमारे संस्था के साथ कभी भी ग्रुप में और पेज पर जुड़ सकते हैं और रक्तदान के मुहिम को चला सकते हैं और दूसरा तरीका है की “साधना फाउंडेशन” की सदस्यता ग्रहण की जाए। जिसमें आपको अपनी एक फोटो, एक आईडी प्रूफ की फोटो कॉपी और 300 रूपए की फीस देनी पड़ती है और हर माह आपको संस्था में मात्र 100 रूपए देने होते है। जिससे की संस्था के किसी भी कार्य में कोई रुकावट ना आए और हर फीस की रसीद भी आपको तुरंत प्राप्त होगी।

आप अपने व्यक्तिगत जीवन और मिशन के बीच किस तरह सामंजस्य बनाते है ?

व्यक्तिगत जीवन और मिशन के बीच शुरुआती समय में थोड़ी दिक्कत होती थी। मगर अब कोई भी समस्या नहीं आती क्योंकि पारिवारिक जीवन में और सामाजिक जीवन में आदत बन चुकी है। दोनों का मेल-मिलाप सही तरीके से चल रहा है।

देश के युवाओं को आप क्या संदेश देना चाहेंगे ?

देश के युवाओं से मैं बस यही कहना चाहूंगा की देश को आपकी जरूरत है। यदि देश के युवा अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित नहीं होंगे तो देश का कभी विकास नहीं होगा। यह जरूरी नहीं की देश के लिए काम वर्दी पहनकर ही किया जाए। यह तो हम किसी भी रूप में और कभी भी कर सकते हैं। आज हर इंसान को एक रक्तदाता बनने की जरूरत है क्योंकि देश को आज भी रक्तदानी और अंगदानी की सख्त जरूरत है।

Lets Help India से बातचीत करने के लिए धन्यवाद और हम आशा करते है की भारत सरकार के मिशन विजन 2020 तक 100% स्वैच्छिक रक्तदान की कार्यप्रणाली को सफल बनाने में “साधना फाउंडेशन” का एक अहम योगदान होगा। लोगों को जागरूक करने का आपका प्रयास सफल रहे, साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोग आपकी संस्था से जुड़े, ताकि कभी भी कोई इंसान खून की कमी का शिकार ना हो पाये। हर एक जीवन अपने आप मे कीमती है। आपका और आपकी संस्था का प्रयास हमेशा सराहनीय रहेगा। आपको हमारी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाए।