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कैराना से हिन्दुओ का पलायन।

कैराना में हिंदू परिवारों के पलायन के मुद्दे ने एक बार फिर अखिलेश सरकार और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सच जानने के लिए हर राजनैतिक पार्टी जांच की मांग कर रही है। परन्तु सभी का मानना है की यह मुद्दा अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव में हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण कर सकता है। सभी विपक्षी पार्टियों को लगता है कि भाजपा हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में है, ताकि अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदा उठाया जा सके।

इसी बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर चार हफ्ते के अंदर जवाब की मांग की है। भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया है कि कैराना में बढ़ते अपराध, गुंडागर्दी, धमकी और लूटपाट की वजहों से पलायन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है।

कैराना के स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मुकीम काला जो की एक कुख्यात बदमाश हैं जेल से फिरौती का रैकेट चलाता है। मुकीम काला पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से ही वह सहारनपुर जेल में बंद था। बाद में उसे यूपी के महाराजगंज जेल में शिफ्ट किया गया। लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि काला अभी भी जेल से अपना फिरौती का रैकेट चला रहा है। उनका कहना है की काला के गैंग की तरफ से ही कैराना के गांवों में लगातार धमकी दी जा रही थी, जिसके बाद से लोगों ने घर छोड़ने का फैसला लिया।

इसके उलट सरकारी रिपोर्ट में कहा की कैराना में चिकित्सीय सेवाएं और उच्च शिक्षा की अच्छी व्यवस्था नहीं है, इसलिए वहां के निवासी हरियाणा के जनपदों में जाते रहते हैं। साथ ही वहां रहने वाले व्यापारी अपने व्यापार कि वृधि के लिए हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ व अन्य प्रदेशो में जाते हैं और वहां अपने व्यापार में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए वहीं बस जाते हैं लेकिन इसे पलायन कहना गलत है। रिपोर्ट के अनुसार मुकीम काला के गैंग का कैराना से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि वो गैंग अब लगभग खत्म हो चूका है। मुकीम काला और उसके सभी साथी जेल में बंद है या एनकाउंटर में मारे गए है।

सच क्या है ये आज की व्यवस्था में जानना बहुत मुश्किल है। आज आप न तो सरकारी तंत्र पर भरोसा कर सकते है न मीडिया पर। आज एक आम आदमी को सारी उम्मीदें अब न्यायपालिका से ही है। मगर न्यायपालिका भी कितना काम करेगी। लोकतंत्र में सरकार और मीडिया अपना दायित्व जब ठीक से नहीं निभाती तब लोकतंत्र के बाकि दोनों स्तम्भों पर जोर पड़ता है और अगर सही समय पर इसे नहीं सम्भाला गया तो व्यवस्था देश को टूटने से नहीं बचा सकती।

हक़ीक़त में देखा जाये तो सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम और दूसरे धर्मो के लोग भी कैराना से पलायन कर रहे है। और इन सबके पीछे कोई धार्मिक भावना नहीं सिर्फ सरकारी मशीनरी की विफलता है जिसे सरकारी रिपोर्ट के नीचे छिपाया जा रहा है।

किसी भी देश की दिशा और दशा वहां के लोग तय करते है। जब भी लोग सरकार या किसी संस्था के भरोसे अन्याय को सहते रहते है वहां एक समय के बाद अराजकता ही फैलती है। कश्मीरी पंडित भी सरकार के भरोसे थे और आज भी सरकार के भरोसे ही है। व्यक्ति किसी भी सम्प्रदाय का हो यदि उसे जबरदस्ती अपना घर छोड़ना पड़े तो ये अन्याय है। कैराना जैसे न जाने कितने शहर होंगे जहां से लोगो ने पलायन किया है और कर रहे है। इसे तकनीकी तौर पर न सरकार रोक सकती है न मिलिट्री। इसे सिर्फ लोगो को संगठित करके ही रोका जा सकता है।