Disable Preloader

प्रतिभा पर, पहुँच भारी।

मीडिया मे आए-दिन हज़ारों ख़बरे आती-जाती रहती है। अब उनमे से एक ख़बर को उठाकर देखा जाये तो वो कहानी थी अर्जुन तेंदुलकर और प्रणव धनावड़े। उम्मीद है इन दो नामों मे से एक नाम की अच्छी पहचान होगी आपको क्योंकि वो खुद महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बेटे है।

अब ये प्रणव धनावड़े कौन है? प्रणव एक गरीब परिवार से संबंध रखने वाला लड़का है। जिसके पिता ऑटो ड्राईवर है। प्रणव धनावड़े ने 327 बॉल पर 1009 रन बनाकर भी जब इंडियन U-16 टीम मे अपनी जगह नहीं बना सके, तब इस ख़बर ने मीडिया मे अपनी जगह बनाई। इसका साफ कारण था अर्जुन तेंदुलकर, जो बिना किसी विशेष रिकॉर्ड के भी इंडियन U-16 टीम मे सेलेक्ट हो गए। अब ऐसे मे लाज़मी है कि हर कोई इससे उनके पिता के रुतबे से जोड़कर देखना चाहेगा, क्यूकी उन्हे ही क्रिकेट का भगवान माना जाता है।

ये कोई पहली बार नहीं हुआ है। अक्सर पैसा और रुतबा, गरीब से कई गुना आगे ही होता है। अब ऐसे मे इस तरह के निर्णय एक योग्य इंसान की योग्यता पर बट्टा लगा दे तो वो उसकी ज़िंदगी का सबसे निर्णायक मोड बन जाता है। अगर चयन समिति का नज़रिया ऐसा ही रहा तो, एक बेहतरीन क्रिकेट टीम बनाने के प्रक्रिया मे ना जाने कितने काबिल बच्चे पीछे रह जाएंगे। प्रणव धनावड़े को उसकी गरीबी ने पछाड़ दिया, तो वही अर्जुन तेंदुलकर की मजबूत स्थिति ने उसे संभाल लिया। अब क्या सिर्फ एक अकेली वजह यही थी अर्जुन को चुने जाने की? बताया ये भी गया की अर्जुन को जहां मैदान पर आल-राउंडर माना जाता है, वही प्रणव विकेट-कीपर और अच्छे बैट्समैन है। पर एक अच्छी टीम को दोनों की ही जरूरत पड़ती है।

अब ये बातें ख़बर मे आती तो है, लेकिंन एक-दो दिन मे ही अपना किरदार अदा करके सुर्ख़ियो से गायब हो जाती है। आज भी पक्षपात की मार खाकर अनेकों- अनेक कहानिया सफल होते-होते रह जाती है। असल मे उस हालात से गुज़र रहे परिवार की मानसिक स्थिति क्या होगी, उसको कोई सोच भी नहीं सकता, जो इस तरह के भेद-भाव की चपेट मे आते है। पर ये यकीनन सच्च है कि प्रणव धनावड़े इंडियन U-16 टीम मे सेलेक्ट होकर एक बेहतर कल का सपना देख सकता था।